श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.42.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 42 · अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायः

तेषु पौरा जानपदा ब्रह्मक्षत्रपुरोगमाः।

यथोपजोषं विविशू राजानश्‍च कृतासनाः॥ ३४

teṣu paurā jānapadā brahmakṣatrapurogamāḥ|

yathopajoṣaṃ viviśū rājānaśca kṛtāsanāḥ|| 34

अर्थ

उनपर ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि नागरिक तथा ग्रामवासी—सब यथास्थान बैठ गये। राजालोग भी अपने-अपने निश्‍चित स्थानपर जा डटे॥ ३४॥

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