श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

गावः सपाला एतेन दावा‌ग्‍नेः परिमोचिताः।

कालियो दमितः सर्प इन्द्रश्‍च विमदः कृतः॥ २६

gāvaḥ sapālā etena dāvāgneḥ parimocitāḥ|

kāliyo damitaḥ sarpa indraśca vimadaḥ kṛtaḥ|| 26

अर्थ

इन्होंने ही गौ और ग्वालोंको दावानलकी ज्वालासे बचाया था। कालियनागका दमन और इन्द्रका मान-मर्दन भी इन्होंने ही किया था॥ २६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें