॥ श्रीहरिः ॥
गावः सपाला एतेन दावाग्नेः परिमोचिताः।
कालियो दमितः सर्प इन्द्रश्च विमदः कृतः॥ २६
gāvaḥ sapālā etena dāvāgneḥ parimocitāḥ|
kāliyo damitaḥ sarpa indraśca vimadaḥ kṛtaḥ|| 26
अर्थ
इन्होंने ही गौ और ग्वालोंको दावानलकी ज्वालासे बचाया था। कालियनागका दमन और इन्द्रका मान-मर्दन भी इन्होंने ही किया था॥ २६॥
गावः सपाला एतेन दावाग्नेः परिमोचिताः।
कालियो दमितः सर्प इन्द्रश्च विमदः कृतः॥ २६
इन्होंने ही गौ और ग्वालोंको दावानलकी ज्वालासे बचाया था। कालियनागका दमन और इन्द्रका मान-मर्दन भी इन्होंने ही किया था॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 400) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/26/