॥ श्रीहरिः ॥
नित्यं प्रमुदिता गोपा वत्सपाला यथा स्फुटम्।
वनेषु मल्लयुद्धेन क्रीडन्तश्चारयन्ति गाः॥ ३४
nityaṃ pramuditā gopā vatsapālā yathā sphuṭam|
vaneṣu mallayuddhena krīḍantaścārayanti gāḥ|| 34
अर्थ
यह सभी जानते हैं कि गाय और बछड़े चरानेवाले ग्वालिये प्रतिदिन आनन्दसे जंगलोंमें कुश्ती लड़-लड़कर खेलते रहते हैं और गायें चराते रहते हैं॥ ३४॥
नित्यं प्रमुदिता गोपा वत्सपाला यथा स्फुटम्।
वनेषु मल्लयुद्धेन क्रीडन्तश्चारयन्ति गाः॥ ३४
यह सभी जानते हैं कि गाय और बछड़े चरानेवाले ग्वालिये प्रतिदिन आनन्दसे जंगलोंमें कुश्ती लड़-लड़कर खेलते रहते हैं और गायें चराते रहते हैं॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.43.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 401) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/43/34/