श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.43.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 43 · अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः

करीन्द्रस्तमभिद्रुत्य करेण तरसाग्रहीत्।

कराद् विगलितः सोऽमुं निहत्याङ्‌घ्रिष्वलीयत॥ ६

karīndrastamabhidrutya kareṇa tarasāgrahīt|

karād vigalitaḥ so'muṃ nihatyāṅghriṣvalīyata|| 6

अर्थ

कुवलयापीडने भगवान्‌की ओर झपटकर उन्हें बड़ी तेजीसे सूँड़में लपेट लिया; परन्तु भगवान् सूँड़से बाहर सरक आये और उसे एक घूँसा जमाकर उसके पैरोंके बीचमें जा छिपे॥ ६॥

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