श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.44.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 44 · अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायः

स श्येनवेग उत्पत्य मुष्टीकृत्य करावुभौ।

भगवन्तं वासुदेवं क्रुद्धो वक्षस्यबाधत॥ २१

sa śyenavega utpatya muṣṭīkṛtya karāvubhau|

bhagavantaṃ vāsudevaṃ kruddho vakṣasyabādhata|| 21

अर्थ

अब वह अत्यन्त क्रोधित होकर बाजकी तरह झपटा और दोनों हाथोंके घूँसे बाँधकर उसने भगवान् श्रीकृष्णकी छातीपर प्रहार किया॥ २१॥

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