अब वह अत्यन्त क्रोधित होकर बाजकी तरह झपटा और दोनों हाथोंके घूँसे बाँधकर उसने भगवान् श्रीकृष्णकी छातीपर प्रहार किया॥ २१॥
स श्येनवेग उत्पत्य मुष्टीकृत्य करावुभौ।
भगवन्तं वासुदेवं क्रुद्धो वक्षस्यबाधत॥ २१
अब वह अत्यन्त क्रोधित होकर बाजकी तरह झपटा और दोनों हाथोंके घूँसे बाँधकर उसने भगवान् श्रीकृष्णकी छातीपर प्रहार किया॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.44.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 404) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/44/21/