श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.45.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 45 · अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायः

अथो गुरुकुले वासमिच्छन्तावुपजग्मतुः।

काश्यं सान्दीपनिं नाम ह्यवन्तीपुरवासिनम्॥ ३१

atho gurukule vāsamicchantāvupajagmatuḥ|

kāśyaṃ sāndīpaniṃ nāma hyavantīpuravāsinam|| 31

अर्थ

अब वे दोनों गुरुकुलमें निवास करनेकी इच्छासे काश्यपगोत्री सान्दीपनि मुनिके पास गये, जो अवन्तीपुर (उज्जैन) में रहते थे॥ ३१॥

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