॥ श्रीहरिः ॥
तमाह भगवानाशु गुरुपुत्रः प्रदीयताम्।
योऽसाविह त्वया ग्रस्तो बालको महतोर्मिणा॥ ३९
tamāha bhagavānāśu guruputraḥ pradīyatām|
yo'sāviha tvayā grasto bālako mahatormiṇā|| 39
अर्थ
भगवान्ने समुद्रसे कहा—‘समुद्र! तुम यहाँ अपनी बड़ी-बड़ी तरंगोंसे हमारे जिस गुरुपुत्रको बहा ले गये थे, उसे लाकर शीघ्र हमें दो’॥ ३९॥
तमाह भगवानाशु गुरुपुत्रः प्रदीयताम्।
योऽसाविह त्वया ग्रस्तो बालको महतोर्मिणा॥ ३९
भगवान्ने समुद्रसे कहा—‘समुद्र! तुम यहाँ अपनी बड़ी-बड़ी तरंगोंसे हमारे जिस गुरुपुत्रको बहा ले गये थे, उसे लाकर शीघ्र हमें दो’॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.45.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 413) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/45/39/