श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

तमाह भगवान् प्रेष्ठं भक्तमेकान्तिनं क्‍वचित्।

गृहीत्वा पाणिना पाणिं प्रपन्‍नार्तिहरो हरिः॥ २

tamāha bhagavān preṣṭhaṃ bhaktamekāntinaṃ kvacit|

gṛhītvā pāṇinā pāṇiṃ prapannārtiharo hariḥ|| 2

अर्थ

एक दिन शरणागतोंके सारे दुःख हर लेनेवाले भगवान् श्रीकृष्णने अपने प्रिय भक्त और एकान्तप्रेमी उद्धवजीका हाथ अपने हाथमें लेकर कहा—॥ २॥

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