श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

कंसं नागायुतप्राणं मल्लौ गजपतिं तथा।

अवधिष्टां लीलयैव पशूनिव मृगाधिपः॥ २४

kaṃsaṃ nāgāyutaprāṇaṃ mallau gajapatiṃ tathā|

avadhiṣṭāṃ līlayaiva paśūniva mṛgādhipaḥ|| 24

अर्थ

जैसे सिंह बिना किसी परिश्रमके पशुओंको मार डालता है, वैसे ही उन्होंने खेल-खेलमें ही दस हजार हाथियोंका बल रखनेवाले कंस, उसके दोनों अजेय पहलवानों और महान् बलशाली गजराज कुवलयापीडको मार डाला॥ २४॥

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