श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.46.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 46 · अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इत्युक्त उद्धवो राजन् संदेशं भर्तुरादृतः।

आदाय रथमारुह्य प्रययौ नन्दगोकुलम्॥ ७

ityukta uddhavo rājan saṃdeśaṃ bharturādṛtaḥ|

ādāya rathamāruhya prayayau nandagokulam|| 7

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! जब भगवान् श्रीकृष्णने यह बात कही, तब उद्धवजी बड़े आदरसे अपने स्वामीका सन्देश लेकर रथपर सवार हुए और नन्दगाँवके लिये चल पड़े॥ ७॥

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