श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.48.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 48 · अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायः

गच्छ जानीहि तद‍्वृत्तमधुना साध्वसाधु वा।

विज्ञाय तद् विधास्यामो यथा शं सुहृदां भवेत्॥ ३५

gaccha jānīhi tadvṛttamadhunā sādhvasādhu vā|

vijñāya tad vidhāsyāmo yathā śaṃ suhṛdāṃ bhavet|| 35

अर्थ

इसलिये आप वहाँ जाइये और मालूम कीजिये कि उनकी स्थिति अच्छी है या बुरी। आपके द्वारा उनका समाचार जानकर मैं ऐसा उपाय करूँगा, जिससे उन सुहृदोंको सुख मिले’॥ ३५॥

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