श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.5.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

पूजितः सुखमासीनः पृष्ट्वानामयमादृतः।

प्रसक्तधीः स्वात्मजयोरिदमाह विशाम्पते॥ २२

pūjitaḥ sukhamāsīnaḥ pṛṣṭvānāmayamādṛtaḥ|

prasaktadhīḥ svātmajayoridamāha viśāmpate|| 22

अर्थ

परीक्षित्! नन्दबाबाने वसुदेवजीका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। वे आदरपूर्वक आरामसे बैठ गये। उस समय उनका चित्त अपने पुत्रोंमें लग रहा था। वे नन्दबाबासे कुशलमंगल पूछकर कहने लगे॥ २२॥

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