॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.5.9
गोप्यश्चाकर्ण्य मुदिता यशोदायाः सुतोद्भवम्।
आत्मानं भूषयांचक्रुर्वस्त्राकल्पांजनादिभिः॥ ९
gopyaścākarṇya muditā yaśodāyāḥ sutodbhavam|
ātmānaṃ bhūṣayāṃcakrurvastrākalpāṃjanādibhiḥ|| 9
अर्थ
यशोदाजीके पुत्र हुआ है, यह सुनकर गोपियोंको भी बड़ा आनन्द हुआ। उन्होंने सुन्दर-सुन्दर वस्त्र, आभूषण और अंजन आदिसे अपना शृंगार किया॥ ९॥