श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

आयोधनगतं वित्तमनन्तं वीरभूषणम्।

यदुराजाय तत् सर्वमाहृतं प्रादिशत्प्रभुः॥ ४१

āyodhanagataṃ vittamanantaṃ vīrabhūṣaṇam|

yadurājāya tat sarvamāhṛtaṃ prādiśatprabhuḥ|| 41

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण रणभूमिसे अपार धन और वीरोंके आभूषण ले आये थे। वह सब उन्होंने यदुवंशियोंके राजा उग्रसेनके पास भेज दिया॥ ४१॥✎ 1683

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1683 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: मथुरा-वासी → मथुरावासी

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