श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.42

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

एवं सप्तदशकृत्वस्तावत्यक्षौहिणीबलः२।

युयुधे मागधो राजा यदुभिः कृष्णपालितैः॥ ४२

evaṃ saptadaśakṛtvastāvatyakṣauhiṇībalaḥ|

yuyudhe māgadho rājā yadubhiḥ kṛṣṇapālitaiḥ|| 42

अर्थ

परीक्षित्! इस प्रकार सत्रह बार तेईस-तेईस अक्षौहिणी सेना इकट्ठी करके मगधराज जरासन्धने भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा सुरक्षित यदुवंशियोंसे युद्ध किया॥ ४२॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    णीर्नृपः।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 450)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें