श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.50.57

दशम स्कन्ध · अध्याय 50 · अथ पञ्चाशत्तमोऽध्यायः

यद् यद् भगवता दत्तमाधिपत्यं स्वसिद्धये।

सर्वं प्रत्यर्पयामासुर्हरौ भूमिगते नृप॥ ५७

yad yad bhagavatā dattamādhipatyaṃ svasiddhaye|

sarvaṃ pratyarpayāmāsurharau bhūmigate nṛpa|| 57

अर्थ

परीक्षित्! सभी लोकपालोंको भगवान् श्रीकृष्णने ही उनके अधिकारके निर्वाहके लिये शक्तियाँ और सिद्धियाँ दी हैं। जब भगवान् श्रीकृष्ण पृथ्वीपर अवतीर्ण होकर लीला करने लगे, तब सभी सिद्धियाँ उन्होंने भगवान्‌के चरणोंमें समर्पित कर दीं॥ ५७॥

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