जब वे ब्राह्मणदेवता द्वारकापुरीमें पहुँचे तब द्वारपाल उन्हें राजमहलके भीतर ले गये। वहाँ जाकर ब्राह्मण-देवताने देखा कि आदिपुरुष भगवान् श्रीकृष्ण सोनेके सिंहासनपर विराजमान हैं॥ २७॥✎ 1686
द्वारकां स समभ्येत्य प्रतीहारैः प्रवेशितः।
अपश्यदाद्यं पुरुषमासीनं कांचनासने॥ २७
जब वे ब्राह्मणदेवता द्वारकापुरीमें पहुँचे तब द्वारपाल उन्हें राजमहलके भीतर ले गये। वहाँ जाकर ब्राह्मण-देवताने देखा कि आदिपुरुष भगवान् श्रीकृष्ण सोनेके सिंहासनपर विराजमान हैं॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 464) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)