ब्राह्मणोंके परमभक्त भगवान् श्रीकृष्ण उन ब्राह्मणदेवताको देखते ही अपने आसनसे नीचे उतर गये और उन्हें अपने आसनपर बैठाकर वैसी ही पूजा की जैसे देवतालोग उनकी (भगवान्की) किया करते हैं॥ २८॥✎ 1686
दृष्ट्वा ब्रह्मण्यदेवस्तमवरुह्य निजासनात्।
उपवेश्यार्हयांचक्रे यथाऽऽत्मानं दिवौकसः॥ २८
ब्राह्मणोंके परमभक्त भगवान् श्रीकृष्ण उन ब्राह्मणदेवताको देखते ही अपने आसनसे नीचे उतर गये और उन्हें अपने आसनपर बैठाकर वैसी ही पूजा की जैसे देवतालोग उनकी (भगवान्की) किया करते हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 464) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)