आदर-सत्कार, कुशल-प्रश्नके अनन्तर जब ब्राह्मणदेवता खा-पी चुके, आराम-विश्राम कर चुके तब संतोंके परम आश्रय भगवान् श्रीकृष्ण उनके पास गये और अपने कोमल हाथोंसे उनके पैर सहलाते हुए बड़े शान्त भावसे पूछने लगे—॥ २९॥✎ 1686
तं भुक्तवन्तं विश्रान्तमुपगम्य सतां गतिः।
पाणिनाभिमृशन् पादावव्यग्रस्तमपृच्छत॥ २९
आदर-सत्कार, कुशल-प्रश्नके अनन्तर जब ब्राह्मणदेवता खा-पी चुके, आराम-विश्राम कर चुके तब संतोंके परम आश्रय भगवान् श्रीकृष्ण उनके पास गये और अपने कोमल हाथोंसे उनके पैर सहलाते हुए बड़े शान्त भावसे पूछने लगे—॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.52.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 464) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/52/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)