॥ श्रीहरिः ॥
शौरेः सप्तदशाहं वै संयुगानि पराजितः।
त्रयोविंशतिभिः सैन्यैर्जिग्य एकमहं परम्॥ १३
śaureḥ saptadaśāhaṃ vai saṃyugāni parājitaḥ|
trayoviṃśatibhiḥ sainyairjigya ekamahaṃ param|| 13
अर्थ
देखिये, श्रीकृष्णने मुझे तेईस-तेईस अक्षौहिणी सेनाओंके साथ सत्रह बार हरा दिया, मैंने केवल एक बार—अठारहवीं बार उनपर विजय प्राप्त की॥ १३॥
शौरेः सप्तदशाहं वै संयुगानि पराजितः।
त्रयोविंशतिभिः सैन्यैर्जिग्य एकमहं परम्॥ १३
देखिये, श्रीकृष्णने मुझे तेईस-तेईस अक्षौहिणी सेनाओंके साथ सत्रह बार हरा दिया, मैंने केवल एक बार—अठारहवीं बार उनपर विजय प्राप्त की॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 475) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/13/