codayāśvān yataḥ kṛṣṇastasya me saṃyugaṃ bhavet|| 21
अर्थ
परीक्षित्! यह कहकर वह रथपर सवार हो गया और सारथिसे बोला—‘जहाँ कृष्ण हो वहाँ शीघ्र-से-शीघ्र मेरा रथ ले चलो। आज मेरा उसीके साथ युद्ध होगा॥ २१॥
इत्युक्त्वा रथमारुह्य सारथिं प्राह सत्वरः।
चोदयाश्वान् यतः कृष्णस्तस्य मे संयुगं भवेत्॥ २१
परीक्षित्! यह कहकर वह रथपर सवार हो गया और सारथिसे बोला—‘जहाँ कृष्ण हो वहाँ शीघ्र-से-शीघ्र मेरा रथ ले चलो। आज मेरा उसीके साथ युद्ध होगा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.54.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 476) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/54/21/