श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

प्रद्युम्‍नका जन्म और शम्बरासुरका वध

श्रीशुक उवाच

कामस्तु वासुदेवांशो दग्धः प्राग् रुद्रमन्युना।

देहोपपत्तये भूयस्तमेव प्रत्यपद्यत॥ १

kāmastu vāsudevāṃśo dagdhaḥ prāg rudramanyunā|

dehopapattaye bhūyastameva pratyapadyata|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! कामदेव भगवान् वासुदेवके ही अंश हैं। वे पहले रुद्रभगवान्‌की क्रोधाग्‍निसे भस्म हो गये थे। अब फिर शरीर-प्राप्तिके लिये उन्होंने अपने अंशी भगवान् वासुदेवका ही आश्रय लिया॥ १॥✎ 2112

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2112 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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