परीक्षित्! भगवान् प्रद्युम्नने देखा कि उसकी गदा बड़े वेगसे मेरी ओर आ रही है। तब उन्होंने अपनी गदाके प्रहारसे उसकी गदा गिरा दी और क्रोधमें भरकर अपनी गदा उसपर चलायी॥ २०॥✎ 2113
तामापतन्तीं भगवान् प्रद्युम्नो गदया गदाम्।
अपास्य शत्रवे क्रुद्धः प्राहिणोत् स्वगदां नृप॥ २०
परीक्षित्! भगवान् प्रद्युम्नने देखा कि उसकी गदा बड़े वेगसे मेरी ओर आ रही है। तब उन्होंने अपनी गदाके प्रहारसे उसकी गदा गिरा दी और क्रोधमें भरकर अपनी गदा उसपर चलायी॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 483) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)