॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.55.24
निशातमसिमुद्यम्य सकिरीटं सकुण्डलम्।
शम्बरस्य शिरः कायात् ताम्रश्मश्र्वोजसाहरत्॥ २४
niśātamasimudyamya sakirīṭaṃ sakuṇḍalam|
śambarasya śiraḥ kāyāt tāmraśmaśrvojasāharat|| 24
अर्थ
इसके बाद उन्होंने एक तीक्ष्ण तलवार उठायी और शम्बरासुरका किरीट एवं कुण्डलसे सुशोभित सिर, जो लाल-लाल दाढ़ी, मूँछोंसे बड़ा भयंकर लग रहा था, काटकर धड़से अलग कर दिया॥ २४॥✎ 2113