श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

आकीर्यमाणो दिविजैः स्तुवद्भिः कुसुमोत्करैः।

भार्ययाम्बरचारिण्या पुरं नीतो विहायसा॥ २५

ākīryamāṇo divijaiḥ stuvadbhiḥ kusumotkaraiḥ|

bhāryayāmbaracāriṇyā puraṃ nīto vihāyasā|| 25

अर्थ

देवतालोग पुष्पोंकी वर्षा करते हुए स्तुति करने लगे और इसके बाद मायावती रति, जो आकाशमें चलना जानती थी, अपने पति प्रद्युम्‍नजीको आकाशमार्गसे द्वारकापुरीमें ले गयी॥ २५॥✎ 2113

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2113 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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