श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तं शम्बराय कैवर्ता उपाजह्रुरुपायनम्।✎ 1176

सूदा महानसं नीत्वावद्यन् स्वधितिनाद्भुतम्॥ ५

taṃ śambarāya kaivartā upājahrurupāyanam|

sūdā mahānasaṃ nītvāvadyan svadhitinādbhutam|| 5

अर्थ

और उन्होंने उसे ले जाकर शम्बरासुरको भेंटके रूपमें दे दिया। शम्बरासुरके रसोइये उस अद्भुत मच्छको उठाकर रसोईघरमें ले आये और कुल्हाड़ियोंसे उसे काटने लगे॥ ५॥✎ 2112

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1176 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): उपाजहृरुपायनम्। → उपाजह्रुरुपायनम्।
  • #2112 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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