समुद्रमें बालक प्रद्युम्नको एक बड़ा भारी मच्छ निगल गया। तदनन्तर मछुओंने अपने बहुत बड़े जालमें फँसाकर दूसरी मछलियोंके साथ उस मच्छको भी पकड़ लिया॥ ४॥✎ 2112
तं निर्जगार बलवान् मीनः सोऽप्यपरैः सह।
वृतो जालेन महता गृहीतो मत्स्यजीविभिः॥ ४
समुद्रमें बालक प्रद्युम्नको एक बड़ा भारी मच्छ निगल गया। तदनन्तर मछुओंने अपने बहुत बड़े जालमें फँसाकर दूसरी मछलियोंके साथ उस मच्छको भी पकड़ लिया॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 481) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)