परीक्षित्! वह मायावती कामदेवकी यशस्विनी पत्नी रति ही थी। जिस दिन शंकरजीके क्रोधसे कामदेवका शरीर भस्म हो गया था, उसी दिनसे वह उसकी देहके पुनः उत्पन्न होनेकी प्रतीक्षा कर रही थी॥ ७॥✎ 2112
सा च कामस्य वै पत्नी रतिर्नाम यशस्विनी।
पत्युर्निर्दग्धदेहस्य देहोत्पत्तिं प्रतीक्षती॥ ७
परीक्षित्! वह मायावती कामदेवकी यशस्विनी पत्नी रति ही थी। जिस दिन शंकरजीके क्रोधसे कामदेवका शरीर भस्म हो गया था, उसी दिनसे वह उसकी देहके पुनः उत्पन्न होनेकी प्रतीक्षा कर रही थी॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 482) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)