श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.55.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 55 · अथ पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

निरूपिता शम्बरेण सा सूपौदनसाधने।

कामदेवं शिशुं बुद‍्ध्वा चक्रे स्नेहं तदार्भके॥ ८

nirūpitā śambareṇa sā sūpaudanasādhane|

kāmadevaṃ śiśuṃ buddhvā cakre snehaṃ tadārbhake|| 8

अर्थ

उसी रतिको शम्बरासुरने अपने यहाँ दाल-भात बनानेके काममें नियुक्त कर रखा था। जब उसे मालूम हुआ कि इस शिशुके रूपमें मेरे पति कामदेव ही हैं, तब वह उसके प्रति बहुत प्रेम करने लगी॥ ८॥✎ 2112

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