श्रीकृष्णकुमार भगवान् प्रद्युम्न बहुत थोड़े दिनोंमें जवान हो गये। उनका रूप-लावण्य इतना अद्भुत था कि जो स्त्रियाँ उनकी ओर देखतीं, उनके मनमें शृंगार-रसका उद्दीपन हो जाता॥ ९॥✎ 2112
नातिदीर्घेण कालेन स कार्ष्णी रूढयौवनः।
जनयामास नारीणां वीक्षन्तीनां च विभ्रमम्॥ ९
श्रीकृष्णकुमार भगवान् प्रद्युम्न बहुत थोड़े दिनोंमें जवान हो गये। उनका रूप-लावण्य इतना अद्भुत था कि जो स्त्रियाँ उनकी ओर देखतीं, उनके मनमें शृंगार-रसका उद्दीपन हो जाता॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.55.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 482) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/55/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)