उन्होंने वह मणि अपनी गुफामें ले जाकर बच्चेको खेलनेके लिये दे दी। अपने भाई प्रसेनके न लौटनेसे उसके भाई सत्राजित्को बड़ा दुःख हुआ॥ १५॥
सोऽपि चक्रे कुमारस्य मणिं क्रीडनकं बिले।
अपश्यन् भ्रातरं भ्राता सत्राजित् पर्यतप्यत॥ १५
उन्होंने वह मणि अपनी गुफामें ले जाकर बच्चेको खेलनेके लिये दे दी। अपने भाई प्रसेनके न लौटनेसे उसके भाई सत्राजित्को बड़ा दुःख हुआ॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 487) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/15/