वह कहने लगा, ‘बहुत सम्भव है श्रीकृष्णने ही मेरे भाईको मार डाला हो; क्योंकि वह मणि गलेमें डालकर वनमें गया था।’ सत्राजित्की यह बात सुनकर लोग आपसमें काना-फूसी करने लगे॥ १६॥
प्रायः कृष्णेन निहतो मणिग्रीवो वनं गतः।
भ्राता ममेति तच्छ्रुत्वा कर्णे कर्णेऽजपञ्जनाः॥ १६
वह कहने लगा, ‘बहुत सम्भव है श्रीकृष्णने ही मेरे भाईको मार डाला हो; क्योंकि वह मणि गलेमें डालकर वनमें गया था।’ सत्राजित्की यह बात सुनकर लोग आपसमें काना-फूसी करने लगे॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.56.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 487) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/56/16/