श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.57.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 57 · अथ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

नाहमीश्‍वरयोः कुर्यां हेलनं रामकृष्णयोः।

को नु क्षेमाय कल्पेत तयोर्वृजिनमाचरन्॥ १२

nāhamīśvarayoḥ kuryāṃ helanaṃ rāmakṛṣṇayoḥ|

ko nu kṣemāya kalpeta tayorvṛjinamācaran|| 12

अर्थ

‘भगवान् श्रीकृष्ण और बलरामजी सर्व-शक्तिमान् ईश्‍वर हैं। मैं उनका सामना नहीं कर सकता। भला, ऐसा कौन है, जो उनके साथ वैर बाँधकर इस लोक और परलोकमें सकुशल रह सके?॥ १२॥✎ 1692

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1692 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: स्यमन्तक-मणि → स्यमन्तकमणि

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