श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

युधिष्ठिर उवाच

किं न आचरितं श्रेयो न वेदाहमधीश्‍वर।

योगेश्‍वराणां दुर्दर्शो यन्‍नो दृष्टः कुमेधसाम्॥ ११

kiṃ na ācaritaṃ śreyo na vedāhamadhīśvara|

yogeśvarāṇāṃ durdarśo yanno dṛṣṭaḥ kumedhasām|| 11

अर्थ

युधिष्ठिरजीने कहा—‘सर्वेश्‍वर श्रीकृष्ण! हमें इस बातका पता नहीं है कि हमने अपने पूर्वजन्मोंमें या इस जन्ममें कौन-सा कल्याण-साधन किया है? आपका दर्शन बड़े-बड़े योगेश्‍वर भी बड़ी कठिनतासे प्राप्त कर पाते हैं और हम कुबुद्धियोंको घर बैठे ही आपके दर्शन हो रहे हैं’॥ ११॥

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