श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तत्राविध्यच्छरैर्व्याघ्रान् सूकरान् महिषान् रुरून्।

शरभान् गवयान् खड्गान् हरिणाञ्छशशल्लकान्॥ १५

tatrāvidhyaccharairvyāghrān sūkarān mahiṣān rurūn|

śarabhān gavayān khaḍgān hariṇāñchaśaśallakān|| 15

अर्थ

वहाँ उन्होंने बहुत-से बाघ, सूअर, भैंसे, काले हरिन, शरभ, गवय (नीलापन लिये हुए भूरे रंगका एक बड़ा हिरन), गैंडे, हरिन, खरगोश और शल्लक (साही) आदि पशुओंपर अपने बाणोंका निशाना लगाया॥ १५॥

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