श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

तान् निन्युः किंकरा राज्ञे मेध्यान् पर्वण्युपागते।

तृट्परीतः परिश्रान्तो बीभत्सुर्यमुनामगात्॥ १६

tān ninyuḥ kiṃkarā rājñe medhyān parvaṇyupāgate|

tṛṭparītaḥ pariśrānto bībhatsuryamunāmagāt|| 16

अर्थ

उनमेंसे जो यज्ञके योग्य थे, उन्हें सेवकगण पर्वका समय जानकर राजा युधिष्ठिरके पास ले गये। अर्जुन शिकार खेलते-खेलते थक गये थे। अब वे प्यास लगनेपर यमुनाजीके किनारे गये॥ १६॥

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