श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.51

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

नवनागसहस्राणि नागाच्छतगुणान् रथान्।

रथाच्छतगुणानश्‍वानश्‍वाच्छतगुणान् नरान्॥ ५१

navanāgasahasrāṇi nāgācchataguṇān rathān|

rathācchataguṇānaśvānaśvācchataguṇān narān|| 51

अर्थ

राजा न‌ग्‍नजित‍्ने दस हजार गौएँ और तीन हजार ऐसी नवयुवती दासियाँ जो सुन्दर वस्त्र तथा गलेमें स्वर्णहार पहने हुए थीं, दहेजमें दीं। इनके साथ ही नौ हजार हाथी, नौ लाख रथ, नौ करोड़ घोड़े और नौ अरब सेवक भी दहेजमें दिये॥ ५०-५१॥

यह अर्थ श्लोक 50–51 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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