श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.58.52

दशम स्कन्ध · अध्याय 58 · अथाष्टपञ्चाशत्तमोऽध्यायः

दम्पती रथमारोप्य महत्या सेनया वृतौ।

स्नेहप्रक्लिन्‍नहृदयो यापयामास कोसलः॥ ५२

dampatī rathamāropya mahatyā senayā vṛtau|

snehapraklinnahṛdayo yāpayāmāsa kosalaḥ|| 52

अर्थ

कोसलनरेश राजा न‌ग्‍नजित‍्ने कन्या और दामादको रथपर चढ़ाकर एक बड़ी सेनाके साथ विदा किया। उस समय उनका हृदय वात्सल्य-स्नेहके उद्रेकसे द्रवित हो रहा था॥ ५२॥

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