॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.58.9
तदैव कुशलं नोऽभूत् सनाथास्ते कृता वयम्।
ज्ञातीन् नः स्मरता कृष्ण भ्राता मे प्रेषितस्त्वया॥ ९
tadaiva kuśalaṃ no'bhūt sanāthāste kṛtā vayam|
jñātīn naḥ smaratā kṛṣṇa bhrātā me preṣitastvayā|| 9
अर्थ
‘श्रीकृष्ण! जिस समय तुमने हमलोगोंको अपना कुटुम्बी, सम्बन्धी समझकर स्मरण किया और हमारा कुशल-मंगल जाननेके लिये भाई अक्रूरको भेजा, उसी समय हमारा कल्याण हो गया, हम अनाथोंको तुमने सनाथ कर दिया॥ ९॥