॥ श्रीहरिः ॥
यानि योधैः प्रयुक्तानि शस्त्रास्त्राणि कुरूद्वह।
हरिस्तान्यच्छिनत्तीक्ष्णैः शरैरेकैकशस्त्रिभिः॥ १७
yāni yodhaiḥ prayuktāni śastrāstrāṇi kurūdvaha|
haristānyacchinattīkṣṇaiḥ śarairekaikaśastribhiḥ|| 17
अर्थ
परीक्षित्! भौमासुरके सैनिकोंने भगवान्पर जो-जो अस्त्र-शस्त्र चलाये थे, उनमेंसे प्रत्येकको भगवान्ने तीन-तीन तीखे बाणोंसे काट गिराया॥ १७॥✎ 2115
यानि योधैः प्रयुक्तानि शस्त्रास्त्राणि कुरूद्वह।
हरिस्तान्यच्छिनत्तीक्ष्णैः शरैरेकैकशस्त्रिभिः॥ १७
परीक्षित्! भौमासुरके सैनिकोंने भगवान्पर जो-जो अस्त्र-शस्त्र चलाये थे, उनमेंसे प्रत्येकको भगवान्ने तीन-तीन तीखे बाणोंसे काट गिराया॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.59.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 506) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/59/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #2115 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि