श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.59.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 59 · अथैकोनषष्टितमोऽध्यायः

तद् भौमसैन्यं भगवान् गदाग्रजो

विचित्रवाजैर्निशितैः शिलीमुखैः।

निकृत्तबाहूरुशिरोध्रविग्रहं

चकार तर्ह्येव हताश्‍वकुञ्जरम्॥ १६

tad bhaumasainyaṃ bhagavān gadāgrajo

vicitravājairniśitaiḥ śilīmukhaiḥ|

nikṛttabāhūruśirodhravigrahaṃ

cakāra tarhyeva hatāśvakuñjaram|| 16

अर्थ

अब भगवान् श्रीकृष्ण भी चित्र-विचित्र पंखवाले तीखे-तीखे बाण चलाने लगे। इससे उसी समय भौमासुरके सैनिकोंकी भुजाएँ, जाँघें, गर्दन और धड़ कट-कटकर गिरने लगे; हाथी और घोड़े भी मरने लगे॥ १६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें