॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.59.16
तद् भौमसैन्यं भगवान् गदाग्रजो
विचित्रवाजैर्निशितैः शिलीमुखैः।
निकृत्तबाहूरुशिरोध्रविग्रहं
चकार तर्ह्येव हताश्वकुञ्जरम्॥ १६
tad bhaumasainyaṃ bhagavān gadāgrajo
vicitravājairniśitaiḥ śilīmukhaiḥ|
nikṛttabāhūruśirodhravigrahaṃ
cakāra tarhyeva hatāśvakuñjaram|| 16
अर्थ
अब भगवान् श्रीकृष्ण भी चित्र-विचित्र पंखवाले तीखे-तीखे बाण चलाने लगे। इससे उसी समय भौमासुरके सैनिकोंकी भुजाएँ, जाँघें, गर्दन और धड़ कट-कटकर गिरने लगे; हाथी और घोड़े भी मरने लगे॥ १६॥