श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.15

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

ईषामात्रोग्रदंष्ट्रास्यं गिरिकन्दरनासिकम्।

गण्डशैलस्तनं रौद्रं प्रकीर्णारुणमूर्धजम्॥ १५

īṣāmātrogradaṃṣṭrāsyaṃ girikandaranāsikam|

gaṇḍaśailastanaṃ raudraṃ prakīrṇāruṇamūrdhajam|| 15

अर्थ

पूतनाका शरीर बड़ा भयानक था, उसका मुँह हलके समान तीखी और भयंकर दाढ़ोंसे युक्त था। उसके नथुने पहाड़की गुफाके समान गहरे थे और स्तन पहाड़से गिरी हुई चट्टानोंकी तरह बड़े-बड़े थे। लाल-लाल बाल चारों ओर बिखरे हुए थे॥ १५॥

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