श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सन्तत्रसुः स्म तद् वीक्ष्य गोपा गोप्यः कलेवरम्।

पूर्वं तु तन्‍निःस्वनितभिन्‍नहृत्कर्णमस्तकाः॥ १७

santatrasuḥ sma tad vīkṣya gopā gopyaḥ kalevaram|

pūrvaṃ tu tanniḥsvanitabhinnahṛtkarṇamastakāḥ|| 17

अर्थ

पूतनाके उस शरीरको देखकर सब-के-सब ग्वाल और गोपी डर गये। उसकी भयंकर चिल्लाहट सुनकर उनके हृदय, कान और सिर तो पहले ही फट-से रहे थे॥ १७॥

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