श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.6.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

इति प्रणयबद्धाभिर्गोपीभिः कृतरक्षणम्।

पाययित्वा स्तनं माता संन्यवेशयदात्मजम्॥ ३०

iti praṇayabaddhābhirgopībhiḥ kṛtarakṣaṇam|

pāyayitvā stanaṃ mātā saṃnyaveśayadātmajam|| 30

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार गोपियोंने प्रेमपाशमें बँधकर भगवान् श्रीकृष्णकी रक्षा की। माता यशोदाने अपने पुत्रको स्तन पिलाया और फिर पालनेपर सुला दिया॥ ३०॥✎ 2060

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2060 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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