श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार गोपियोंने प्रेमपाशमें बँधकर भगवान् श्रीकृष्णकी रक्षा की। माता यशोदाने अपने पुत्रको स्तन पिलाया और फिर पालनेपर सुला दिया॥ ३०॥✎ 2060
इति प्रणयबद्धाभिर्गोपीभिः कृतरक्षणम्।
पाययित्वा स्तनं माता संन्यवेशयदात्मजम्॥ ३०
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इस प्रकार गोपियोंने प्रेमपाशमें बँधकर भगवान् श्रीकृष्णकी रक्षा की। माता यशोदाने अपने पुत्रको स्तन पिलाया और फिर पालनेपर सुला दिया॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.6.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 160) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/6/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)