श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

तान् प्राप्तानर्थिनो हित्वा चैद्यादीन् स्मरदुर्मदान्।

दत्ता भ्रात्रा स्वपित्रा च कस्मान्‍नो ववृषेऽसमान्॥ ११

tān prāptānarthino hitvā caidyādīn smaradurmadān|

dattā bhrātrā svapitrā ca kasmānno vavṛṣe'samān|| 11

अर्थ

तुम्हारे पिता और भाई भी उन्हींके साथ तुम्हारा विवाह करना चाहते थे, यहाँतक कि उन्होंने वाग्दान भी कर दिया था। शिशुपाल आदि बड़े-बड़े वीरोंको, जो कामोन्मत्त होकर तुम्हारे याचक बन रहे थे, तुमने छोड़ दिया और मेरे-जैसे व्यक्तिको, जो किसी प्रकार तुम्हारे समान नहीं है, अपना पति स्वीकार किया। ऐसा तुमने क्यों किया?॥ ११॥✎ 1438

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1438 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विदर्भ-राजकुमारी! → विदर्भराजकुमारी!

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