श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

अस्पष्टवर्त्मनां पुंसामलोकपथमीयुषाम्।

आस्थिताः पदवीं सुभ्रूः प्रायः सीदन्ति योषितः॥ १३

aspaṣṭavartmanāṃ puṃsāmalokapathamīyuṣām|

āsthitāḥ padavīṃ subhrūḥ prāyaḥ sīdanti yoṣitaḥ|| 13

अर्थ

सुन्दरी! हम किस मार्गके अनुयायी हैं, हमारा कौन-सा मार्ग है, यह भी लोगोंको अच्छी तरह मालूम नहीं है। हमलोग लौकिक व्यवहारका भी ठीक-ठीक पालन नहीं करते, अनुनय-विनयके द्वारा स्त्रियोंको रिझाते भी नहीं। जो स्त्रियाँ हमारे-जैसे पुरुषोंका अनुसरण करती हैं, उन्हें प्रायः क्लेश-ही-क्लेश भोगना पड़ता है॥ १३॥✎ 1438

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1438 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विदर्भ-राजकुमारी! → विदर्भराजकुमारी!

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