परीक्षित्! जो सर्वशक्तिमान् भगवान् खेल-खेलमें ही इस जगत्की रचना, रक्षा और प्रलय करते हैं—वही अजन्मा प्रभु अपनी बनायी हुई धर्म-मर्यादाओंकी रक्षा करनेके लिये यदुवंशियोंमें अवतीर्ण हुए हैं॥ २॥✎ 143721162117
यस्त्वेतल्लीलया विश्वं सृजत्यत्त्यवतीश्वरः।
स हि जातः स्वसेतूनां गोपीथाय यदुष्वजः॥ २
परीक्षित्! जो सर्वशक्तिमान् भगवान् खेल-खेलमें ही इस जगत्की रचना, रक्षा और प्रलय करते हैं—वही अजन्मा प्रभु अपनी बनायी हुई धर्म-मर्यादाओंकी रक्षा करनेके लिये यदुवंशियोंमें अवतीर्ण हुए हैं॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.60.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 510) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/60/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)