श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.60.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 60 · अथ षष्टितमोऽध्यायः

पयःफेननिभे शुभ्रे पर्यंके कशिपूत्तमे।

उपतस्थे सुखासीनं जगतामीश्‍वरं पतिम्॥ ६

payaḥphenanibhe śubhre paryaṃke kaśipūttame|

upatasthe sukhāsīnaṃ jagatāmīśvaraṃ patim|| 6

अर्थ

ऐसे महलमें दूधके फेनके समान कोमल और उज्ज्वल बिछौनोंसे युक्त सुन्दर पलँगपर भगवान् श्रीकृष्ण बड़े आनन्दसे विराजमान थे और रुक्मिणीजी त्रिलोकीके स्वामीको पतिरूपमें प्राप्त करके उनकी सेवा कर रही थीं॥ ६॥✎ 1437 2116 2117

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #1437 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): महक → मँहक
  • #2116 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2117 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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