ऐसे महलमें दूधके फेनके समान कोमल और उज्ज्वल बिछौनोंसे युक्त सुन्दर पलँगपर भगवान् श्रीकृष्ण बड़े आनन्दसे विराजमान थे और रुक्मिणीजी त्रिलोकीके स्वामीको पतिरूपमें प्राप्त करके उनकी सेवा कर रही थीं॥ ६॥✎ 143721162117
पयःफेननिभे शुभ्रे पर्यंके कशिपूत्तमे।
उपतस्थे सुखासीनं जगतामीश्वरं पतिम्॥ ६
ऐसे महलमें दूधके फेनके समान कोमल और उज्ज्वल बिछौनोंसे युक्त सुन्दर पलँगपर भगवान् श्रीकृष्ण बड़े आनन्दसे विराजमान थे और रुक्मिणीजी त्रिलोकीके स्वामीको पतिरूपमें प्राप्त करके उनकी सेवा कर रही थीं॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.60.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 511) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/60/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)