श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

अथैकषष्टितमोऽध्यायः

भगवान्‌की सन्ततिका वर्णन तथा अनिरुद्धके विवाहमें रुक्मीका मारा जाना

श्रीशुक उवाच

एकैकशस्ताः कृष्णस्य पुत्रान् दश दशाबलाः।

अजीजनन्‍ननवमान्पितुः सर्वात्मसम्पदा॥ १

ekaikaśastāḥ kṛṣṇasya putrān daśa daśābalāḥ|

ajījanannanavamānpituḥ sarvātmasampadā|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णकी प्रत्येक पत्‍नीके गर्भसे दस-दस पुत्र उत्पन्‍न हुए। वे रूप, बल आदि गुणोंमें अपने पिता भगवान् श्रीकृष्णसे किसी बातमें कम न थे॥ १॥

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