श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.61.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 61 · अथैकषष्टितमोऽध्यायः

तदाब्रवीन्‍नभोवाणी बलेनैव जितो ग्लहः।

धर्मतो वचनेनैव रुक्मी वदति वै मृषा॥ ३३

tadābravīnnabhovāṇī balenaiva jito glahaḥ|

dharmato vacanenaiva rukmī vadati vai mṛṣā|| 33

अर्थ

उस समय आकाशवाणीने कहा—‘यदि धर्मपूर्वक कहा जाय, तो बलरामजीने ही यह दाँव जीता है। रुक्मीका यह कहना सरासर झूठ है कि उसने जीता है’॥ ३३॥✎ 1696

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1696 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: धर्म-पूर्वक → धर्मपूर्वक

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